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खोया बचपन

4.8
513

खोया बचपन चलो लेखनी आज स्मरण उसे करा दें जो बालक बना मजदूर नवचेतना जगा दें मजबूर है मजदूर वह बचपन उसे लौटा दें । जब नन्हें कोमल हाथ कचरे को उठाता है तब रोम रोम उसका क्रंदन कर रोता है डालें न ...

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लेखक के बारे में
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Indira Kumari

मैं इंदिरा एक गृहिणी हूँ । मेरी शैक्षणिक योग्यता M.Sc (Chem)और B.ed है। मुझे प्रकृति व संवेदनशील घटना पर कविता लिखना अच्छा लगता है। इसके अलावा हास्य, व्यंग्य, जोगीरा (होली)पर भी लिखती हूँ ।और आपसे पढ़ने की अपेक्षा रखती हूँ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sunil Shukla
    04 August 2019
    बचपन को मजबूर नहीं होने देना है ।यह संकल्प सभी को लेना है। खोया बचपन समाज को जागरूक करने वाली कविता।शानदार एवं सार्थक रचना🍂🍃🌾🌿🌼
  • author
    14 November 2018
    मजबूरी को हटाना होगा बचपन को बचाना होगा 😍😍😍
  • author
    rafat parveen
    02 June 2022
    वाओ बहुत उम्दा
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    Sunil Shukla
    04 August 2019
    बचपन को मजबूर नहीं होने देना है ।यह संकल्प सभी को लेना है। खोया बचपन समाज को जागरूक करने वाली कविता।शानदार एवं सार्थक रचना🍂🍃🌾🌿🌼
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    14 November 2018
    मजबूरी को हटाना होगा बचपन को बचाना होगा 😍😍😍
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    rafat parveen
    02 June 2022
    वाओ बहुत उम्दा