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"क्यों बात बात पर बच्चों की तरह ज़िद करने लगी हो?"-रवि ने थोड़ा खीजते हुए कहा "अच्छा ... आज मैं बड़ी हो गयी..? उस दिन जब मैंने कहा था कि मुझे चालीस की उम्र में,यूँ तुमसे छुप- छुप के मिलने आना पसंद...

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लेखक के बारे में
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इरा टाक

इरा टाक का परिचय- इरा टाक लेखक, चित्रकार और फिल्मकार हैं। बीकानेर में जन्मी इरा टाक बीएससी, एमए (इतिहास ), और मास कम्युनिकेशन में स्नातकोतर डिप्लोमा हासिल किये हुए हैं। जयपुर की इरा, वर्तमान में मुंबई रह कर अपनी रचनात्मक यात्रा में लगी हैं। वे भारत में हिंदी ऑडियो स्टोरी की दुनिया में लेखक के रूप में जाना पहचाना नाम है। अभी हाल ही में पेंगुइन रैंडम हाउस- हिंद पॉकेट बुक्स से उनका नॉवेल लव ड्रग रिलीज हुआ है. उनकी लेखकीय यात्रा में पड़ाव हैं: तीन काव्य संग्रह - अनछुआ ख़्वाब, मेरे प्रिय, कैनवस पर धूप , कहानी संग्रह - रात पहेली, चाँद पास है, नॉवेल - लव ड्रग (Penguin Random house- Hind pocket books), रिस्क @ इश्क़, मूर्ति , ऑडियो नावेल (Storytel)- गुस्ताख इश्क, प्यार के इस खेल में, ऑडियो बुक्स- मेरे हमनफ़स, ये मुलाक़ात एक बहाना है, किलर ऑन हंट, रिज़र्व सीट, पटरी पर इश्क़, रंगरेज़ पिया आदि (Storytel)। लाइफ लेसन बुक्स- लाइफ सूत्र और RxLove366. फिल्ममेकर के रूप में चार शॉर्ट फिक्शन फिल्म्स - फ्लर्टिंग मैनिया, डब्लू टर्न, इवन दा चाइल्ड नोज और रेनबो उनके खाते में दर्ज़ हैं। इस समय वो बॉलीवुड में पटकथा (script writing) लेखन कर रहीं हैं। चित्रकार के रूप में वे दस एकल प्रदर्शनियां कर चुकी हैं।

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  • author
    mamta kashyap
    01 जुलाई 2020
    कभी कभी ऐसा होता है कि हमारी ज़िंदगी की कहानी को किसी ओर ने पन्नो पे उतारा होता है। इस कहानी में मैंने अपनी ज़िंदगी को दुबारा देखा है फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ 2 साल का रिश्ता था लेकिन मैने तो 10 साल की दोस्ती में 7 का रिश्ता ओर अपनी जिंदगी ही देदी। कहते है भगवान ने आदमी और औरत को एक बनाया है लेकिन बेवफ़ाई किसकी फ़ितरत में लिखी है कोई नही जानता । ओर जिसके साथ बेवफ़ाई हो तो ऐ फिर किसी ओर को नही मानता। कहने को तो ये कहानी एक किस्सा है, जिसमे मेरे गुजरे हुए वक़्त का अक्स दिखता है। सोचती हूं कि गुजर जाएगी उसके बिना भी, है मुश्किल क्योंकि वो एक अधूरा हिस्सा है।।
  • author
    Akanksha Dikshit
    15 सितम्बर 2018
    अच्छी कहानी। सच है खुशी तो अपने ही अन्दर से मिलती है।कोई इतना भी महत्वपूर्ण नही होता कि उसके लिए अपना जीवन बर्बाद किया जाए।कोई सकारात्मक कारण तो मिल ही जाता है जो जीने की वजह बने।
  • author
    Umang Singh
    17 फ़रवरी 2017
    kahani me tartamya ka abhav. kathanak ko aur chust banayen.
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    mamta kashyap
    01 जुलाई 2020
    कभी कभी ऐसा होता है कि हमारी ज़िंदगी की कहानी को किसी ओर ने पन्नो पे उतारा होता है। इस कहानी में मैंने अपनी ज़िंदगी को दुबारा देखा है फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ 2 साल का रिश्ता था लेकिन मैने तो 10 साल की दोस्ती में 7 का रिश्ता ओर अपनी जिंदगी ही देदी। कहते है भगवान ने आदमी और औरत को एक बनाया है लेकिन बेवफ़ाई किसकी फ़ितरत में लिखी है कोई नही जानता । ओर जिसके साथ बेवफ़ाई हो तो ऐ फिर किसी ओर को नही मानता। कहने को तो ये कहानी एक किस्सा है, जिसमे मेरे गुजरे हुए वक़्त का अक्स दिखता है। सोचती हूं कि गुजर जाएगी उसके बिना भी, है मुश्किल क्योंकि वो एक अधूरा हिस्सा है।।
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    Akanksha Dikshit
    15 सितम्बर 2018
    अच्छी कहानी। सच है खुशी तो अपने ही अन्दर से मिलती है।कोई इतना भी महत्वपूर्ण नही होता कि उसके लिए अपना जीवन बर्बाद किया जाए।कोई सकारात्मक कारण तो मिल ही जाता है जो जीने की वजह बने।
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    Umang Singh
    17 फ़रवरी 2017
    kahani me tartamya ka abhav. kathanak ko aur chust banayen.