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खबर नही है

4.2
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तुफानों का गजब मंजर नहीं है इसीलिए खौफ में ये शहर नहीं है तलाश आया हूँ मंजिलो के ठिकाने कहीं मील का अजी पत्थर नहीं है कई जादूगरी होती यहाँ थी कहें क्या हाथ बाकी हुनर नहीं है गनीमत है मरीज यहाँ सलामत ...

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लेखक के बारे में
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सुशील यादव

जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़ रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर , कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |

समीक्षा
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  • author
    Vikas Kumar
    01 जून 2023
    वाह, आप प्रतिभाशाली हैं। लिखते रहिए।
  • author
    Poonam Panwar
    26 मई 2020
    good but too small
  • author
    @स्वामी
    19 अप्रैल 2020
    उर्दू भाषा का प्रयोग
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    Vikas Kumar
    01 जून 2023
    वाह, आप प्रतिभाशाली हैं। लिखते रहिए।
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    Poonam Panwar
    26 मई 2020
    good but too small
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    @स्वामी
    19 अप्रैल 2020
    उर्दू भाषा का प्रयोग