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कविता - रक्तदान है महादान

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13.06.2020 Saturday 01:40 PM कविता - रक्तदान है महादान... मानवता का हुआ है भान बहुत कीमती मानव-जान जीवन के अर्थ को समझो तत्पर होकर बचाओ जान रक्तदान है महादान मत गिरने दो अपना ईमान जनहित से देश ...

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लेखक के बारे में

शब्दों और लफ़्ज़ों की दुनियां में सुकून ढूंढ़ता एक परिंदा.. कृपया मेरी सभी रचनाओं को पढ़कर समीक्षा दें और त्रुटि भी बताएं जिससे मैं अपनी लेखनी में सुधार ला सकूँ. तेरी मोहब्बत किराए के मकान जैसी "उड़ता" ,तमाम उम्र सहेजी मगर अपनी ना हो सकी... शीशे ने टूट कर अपनी कशिश बता दी "उड़ता ", मगर हम तो रहे पत्थर से जो टूटने के भी काबिल नहीं... सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता ",झज्जर (हरियाणा )

समीक्षा
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  • author
    ओमप्रकाश जैन
    13 जून 2020
    वाह! बहुत खूब
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    ओमप्रकाश जैन
    13 जून 2020
    वाह! बहुत खूब