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कविता:--- ✍️✍️✍️ग्रामीण जीवन✍️✍️✍️

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मैं रहता शहर से कोसों दूर अडहल मेरे गाँव में है नूर शबनम की बरसती है फूल इसी को कहते गाँव का मूल।। प्रकृति अपनी खुशी निखारती सतरंगी रंगों का रंग बिखेरती इन्द्रधनुष की बहुरंग चमकती इसी को कहते ...

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लेखक के बारे में
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Harmankumar Baghel

मैं हरमन कुमार बघेल व्याख्याता शास.क.उ.मा.वि.आरंग रायपुर छ.ग. आज के परिवेश में सहज-सरल समझने योग्य मेरी मुक्त कवितायें आप सभी श्रेष्ठ जनों को पसंद आ रही है तो मेरी रचना एक बार अवश्य पढ़े व अपना आशीर्वाद अवश्य बनायें रखें।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    07 फ़रवरी 2023
    bahut sunder, lajwab anubhuti aapki mitr 🙏🙏🌷
  • author
    mehar singh
    12 फ़रवरी 2023
    bhaut hi khubsurat👌👌
  • author
    Pratilipi Premium
    07 फ़रवरी 2023
    very nicely written sir🙏🌹🌹
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    07 फ़रवरी 2023
    bahut sunder, lajwab anubhuti aapki mitr 🙏🙏🌷
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    mehar singh
    12 फ़रवरी 2023
    bhaut hi khubsurat👌👌
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    Pratilipi Premium
    07 फ़रवरी 2023
    very nicely written sir🙏🌹🌹