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क़त्ल

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4.6

दो लाशें थीं क्षत -विक्षत विद्रूप रपट थी कि जवान लाशें प्रेम में थीं एक हिन्दू / एक मुसलमान आश्चर्य लाशों के धर्म शेष थे अब तक लाशें न किसी का बेटा थीं और न ही बेटी !! धर्म जिन्दा था / क़त्ल सिर्फ...