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क़त्ल

4.6
329

दो लाशें थीं क्षत -विक्षत विद्रूप रपट थी कि जवान लाशें प्रेम में थीं एक हिन्दू / एक मुसलमान आश्चर्य लाशों के धर्म शेष थे अब तक लाशें न किसी का बेटा थीं और न ही बेटी !! धर्म जिन्दा था / क़त्ल सिर्फ ...

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लेखक के बारे में
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अमित आनंद

जन्म - 27 नवम्बर 1979 सम्प्रति - कम्पुटर व्यवसाय शिक्षा - एम ए (साहित्य )

समीक्षा
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    08 अगस्त 2018
    अच्छा व्यंग्य किया हैं आपने इस समाज की सोच पर
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    shweta kumari
    12 अगस्त 2018
    wahhhh
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    08 अगस्त 2018
    अच्छा व्यंग्य किया हैं आपने इस समाज की सोच पर
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    shweta kumari
    12 अगस्त 2018
    wahhhh