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कट गई झगड़े में सारी रात वस्ल - ए - यार की

4.5
707

कट गई झगड़े में सारी रात वस्ल-ए-यार की शाम को बोसा लिया था, सुबह तक तक़रार की ज़िन्दगी मुमकिन नहीं अब आशिक़-ए-बीमार की छिद गई हैं बरछियाँ दिल में निगाह-ए-यार की हम जो कहते थे न जाना बज़्म में अग़यार ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अकबर हुस्सैन रिज़वी उपनाम : अकबर अलाहाबादी जन्म : 16 नवंबर 1846 देहावसान: 15 फरवरी 1921 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल, शायरी अकबर अलाहाबादी उर्दू व्यंग्य के अग्रणी रचनाकारों में से एक हैं, इनके काफी शेरों एवम ग़ज़लों में सामाजिक दर्द को सरल भाषा में हास्यपूर्क ढंग से उकेरा गया है। "हंगामा है क्यूं बरपा" इनकी मशहूर ग़ज़लों में से एक है

समीक्षा
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  • author
    S Yadav Sampla
    10 जून 2021
    वहा ,...... क्या खूब लिखा है आपने....
  • author
    amit shukla
    29 अप्रैल 2020
    wah umda .....👌
  • author
    13 जनवरी 2020
    अवेसोमे
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    S Yadav Sampla
    10 जून 2021
    वहा ,...... क्या खूब लिखा है आपने....
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    amit shukla
    29 अप्रैल 2020
    wah umda .....👌
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    13 जनवरी 2020
    अवेसोमे