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कालू का भोजन

4.7
5874

एक व्यंग है मानव जाति पर जानवर का, आशा करता हूँ कहानी पसंद आएगी।

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लेखक के बारे में
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विनीत शर्मा

पेशे से चिकित्सक, साहित्य में अज्ञानी। त्रुटियों के लिए स्पर्शक की क्षमा प्रार्थना 🙏🙏 . आपत्ति दर्ज करने या सुझाव के लिए आप मेरे फोन पर भी संपर्क साध सकते हैं। 9999656568

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    पूनम रानी
    22 मई 2019
    अच्छी रचना,झूठा न छोड़ना जसा अच्छा सन्देश परन्तु आज के जमाने में मुझे टेंट में कहते हैं कि ऐसे सारा मत खा,कोई क्या सोचेगा।बिलकुल थोड़ा लेती है,खाना तो क्या चाय या जूस भी जरा सा नही छोड़ती।ऐसे छोड़ दिया कर नही तो personlty down हो जायेगी।लेकिन मैं नही मानती।कुछ कहानियां सिर्फ पढ़ने के लिए नही बल्कि उनकी सिख जीवन में अपनाने के लिए होती है।इस कहानी में वसी ही सिख है।
  • author
    Virmati Singh
    20 सितम्बर 2019
    bhojan ki ho rhi barbadi par achchha vyangy..aaj k buuffer system se purana pattal wali dawat achchhi thi.
  • author
    दीपक पपनेजा
    18 जनवरी 2019
    बेहतरीन sir,,, मेरी तो आंखे खोल दी इस कहानी ने,,प्रणाम आपको।
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    पूनम रानी
    22 मई 2019
    अच्छी रचना,झूठा न छोड़ना जसा अच्छा सन्देश परन्तु आज के जमाने में मुझे टेंट में कहते हैं कि ऐसे सारा मत खा,कोई क्या सोचेगा।बिलकुल थोड़ा लेती है,खाना तो क्या चाय या जूस भी जरा सा नही छोड़ती।ऐसे छोड़ दिया कर नही तो personlty down हो जायेगी।लेकिन मैं नही मानती।कुछ कहानियां सिर्फ पढ़ने के लिए नही बल्कि उनकी सिख जीवन में अपनाने के लिए होती है।इस कहानी में वसी ही सिख है।
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    Virmati Singh
    20 सितम्बर 2019
    bhojan ki ho rhi barbadi par achchha vyangy..aaj k buuffer system se purana pattal wali dawat achchhi thi.
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    दीपक पपनेजा
    18 जनवरी 2019
    बेहतरीन sir,,, मेरी तो आंखे खोल दी इस कहानी ने,,प्रणाम आपको।