आंसू से कोई रिश्ता है, दर्द भरी इन आँखों का
तुम बंद करो अपनी आँखें, हम हँसते नज़र आ जायेंगे
सूखी कलियाँ भूले रस्ते, कल मेरी नियति बन जायेंगे
कल तुम न रहो या हम न रहें, हम मर के तुम्हें याद आयेंगे....
नमस्ते,
अपनी रचनाओं के साथ मैं आपके सामने उपस्थित हूँ | मेरी अधिकतर रचनाएँ तब की हैं जब मैं स्कूल या कॉलेज में पढ़ता था | उस समय प्रेम और भावनाएं मुझे बहुत आकर्षित करती थीं, इसलिए मेरी कहानियों और कविताओं में थोडा युवा होते मन की झलक मिलेगी |
आपसे गुजारिश है कि मेरी कहानियों और कविताओं को पढ़ें, इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता महसूस हो तो मुझे बताकर बेहतर बनाने में मदद करें |
शुभकामनाओं सहित,
आपका
अतुल कुमार पाण्डेय
सारांश
नमस्ते,
अपनी रचनाओं के साथ मैं आपके सामने उपस्थित हूँ | मेरी अधिकतर रचनाएँ तब की हैं जब मैं स्कूल या कॉलेज में पढ़ता था | उस समय प्रेम और भावनाएं मुझे बहुत आकर्षित करती थीं, इसलिए मेरी कहानियों और कविताओं में थोडा युवा होते मन की झलक मिलेगी |
आपसे गुजारिश है कि मेरी कहानियों और कविताओं को पढ़ें, इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता महसूस हो तो मुझे बताकर बेहतर बनाने में मदद करें |
शुभकामनाओं सहित,
आपका
अतुल कुमार पाण्डेय
रिपोर्ट की समस्या
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