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हिन्दी

कल एक कविता लिखूंगी

4.0
1911

थके से दरवाजे उबासी लेती हुई खिड़कियाँ रात भर जागी आँखों की तरह बोझिल दीवारें! रोज सोचती हूँ कल एक कविता लिखूंगी. लेकिन कल नहीं आता आता है केवल नाम विहीन तारीख विहीन एक दिन! जिसमें होते हैं सुबह,...

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लेखक के बारे में

एम.डी.(आयुर्वेद), एम.ए.(हिन्दी), हँस, परिकथा, पाखी, जनसत्ता आदि में कहानियाँ प्रकाशित सम्प्रति: प्राईवेट प्रैक्टिस

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sudhir Kumar Sharma
    01 നവംബര്‍ 2018
    बिना लिखेे सब कुछ लिख दिया कविता इसी का नाम है
  • author
    Anurag Singh
    12 മാര്‍ച്ച് 2017
    Bahut khub
  • author
    nidhi Bansal "Nidhi"
    17 ആഗസ്റ്റ്‌ 2018
    अच्छी है किन्तु पंक्तिया व्यवस्थित नही है।
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  • author
    Sudhir Kumar Sharma
    01 നവംബര്‍ 2018
    बिना लिखेे सब कुछ लिख दिया कविता इसी का नाम है
  • author
    Anurag Singh
    12 മാര്‍ച്ച് 2017
    Bahut khub
  • author
    nidhi Bansal "Nidhi"
    17 ആഗസ്റ്റ്‌ 2018
    अच्छी है किन्तु पंक्तिया व्यवस्थित नही है।