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काकस्पर्श

3.9
37043

अपनी धुन में मस्त रिद्धि को पता भी नहीं था यह आम दिन उसकी जिंदगी का यादगार अंक बन जाएगा | दोपहर में अचानक ही वह हॉल कहे जाने वाले 15*18 के कमरे में घूम -घूम कर चक्कर काटने लगी | उसकी इस हरकत पर ...

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लेखक के बारे में
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Sarita Naresh Bahukhandi

प्रकाशित रचनाएं 2 1-जीवन के रंग काव्य संग्रह 2-आदर्श नहीं यथार्थ कृष्णा सोबती का साहित्य

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Tofik Shaikh
    21 सितम्बर 2018
    कथा badhiya है पर मुझे लगता है कि कथा का अंत लोगो के मस्तिष्क मे एक सवाल छोड जाता है श्रद्धा या अंधश्रद्धा जो पेहले चिकित्सक थी बाद कि मनोदशा समाज मे रूढी योको पणपणे न दे
  • author
    disha Telang
    20 सितम्बर 2018
    Bahut pasand aayi yeh toh sacchi ghatna hey padte hi jaise sab yaad aa gaya ho kaksparsh dil ko sparsh kar gayi bahut sunder
  • author
    Ghrws Thane
    21 सितम्बर 2018
    प्रस्तुत कहानी अत्यंत रोचक एवं जीवंत है। कहानी की भाषा भी सुगम तथा सरल है। कहानी पढ़ते समय पढ़ने की रचि अंत तक बनी रहती है यही इस कहानी की विशेषता है।
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    Tofik Shaikh
    21 सितम्बर 2018
    कथा badhiya है पर मुझे लगता है कि कथा का अंत लोगो के मस्तिष्क मे एक सवाल छोड जाता है श्रद्धा या अंधश्रद्धा जो पेहले चिकित्सक थी बाद कि मनोदशा समाज मे रूढी योको पणपणे न दे
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    disha Telang
    20 सितम्बर 2018
    Bahut pasand aayi yeh toh sacchi ghatna hey padte hi jaise sab yaad aa gaya ho kaksparsh dil ko sparsh kar gayi bahut sunder
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    Ghrws Thane
    21 सितम्बर 2018
    प्रस्तुत कहानी अत्यंत रोचक एवं जीवंत है। कहानी की भाषा भी सुगम तथा सरल है। कहानी पढ़ते समय पढ़ने की रचि अंत तक बनी रहती है यही इस कहानी की विशेषता है।