अपनी धुन में मस्त रिद्धि को पता भी नहीं था यह आम दिन उसकी जिंदगी का यादगार अंक बन जाएगा | दोपहर में अचानक ही वह हॉल कहे जाने वाले 15*18 के कमरे में घूम -घूम कर चक्कर काटने लगी | उसकी इस हरकत पर ...
कथा badhiya है पर मुझे लगता है कि कथा का अंत लोगो के मस्तिष्क मे एक सवाल छोड जाता है श्रद्धा या अंधश्रद्धा जो पेहले चिकित्सक थी बाद कि मनोदशा समाज मे रूढी योको पणपणे न दे
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कथा badhiya है पर मुझे लगता है कि कथा का अंत लोगो के मस्तिष्क मे एक सवाल छोड जाता है श्रद्धा या अंधश्रद्धा जो पेहले चिकित्सक थी बाद कि मनोदशा समाज मे रूढी योको पणपणे न दे
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