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कब तक छलते रहोगे

4.7
308

कब तक तुम मुझे छलते रहोगे बोलो कब तक तुम मुझे छलते रहोगे हर युग में तुम मुझे छलते रहे। सीता बन अग्नि परीक्षा दी मैंने लव कुश को जंगल में मैंने पाला अकेले पर तुम्हे मर्यादा पुरषोत्तम बनाया किसने ? ...

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लेखक के बारे में
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शिप्पी नारंग
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    04 एप्रिल 2023
    नारी की अंतर्वेदना व उसकी महत्ता को रेखांकित करती सुन्दर रचना । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Rajni dixit
    28 नोव्हेंबर 2024
    वाह सुंदर
  • author
    Meera Sajwan "मानवी"
    11 ऑगस्ट 2018
    सुन्दर अभिव्यक्ति।
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  • author
    अरविन्द सिन्हा
    04 एप्रिल 2023
    नारी की अंतर्वेदना व उसकी महत्ता को रेखांकित करती सुन्दर रचना । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Rajni dixit
    28 नोव्हेंबर 2024
    वाह सुंदर
  • author
    Meera Sajwan "मानवी"
    11 ऑगस्ट 2018
    सुन्दर अभिव्यक्ति।