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काश

3.9
1057

काश के गर यूँ होता , मेरे संग तुम होती, क्या हसीं समां होता, जब मैं तुम्हे तकता, और हया के मारे,तुम यूँ पलकें झुकाती, बात ही कुछ और होती,गर ये बात होती, काश! बस एक सुहानी मुलाकात होती। प्यार भरी...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    शुभम पंथ
    27 मई 2017
    अच्छी पंक्तियाँ तुकबंदी पे ध्यान दे या फिर मुक्तछ्न्द ही लिखे
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    15 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा पर कमजोर पकड़ दर्शाती नितांत सारहीन कविता ।
  • author
    Vikkey Uikey
    22 अगस्त 2019
    kafi dard bhara h. ...
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    शुभम पंथ
    27 मई 2017
    अच्छी पंक्तियाँ तुकबंदी पे ध्यान दे या फिर मुक्तछ्न्द ही लिखे
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    15 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा पर कमजोर पकड़ दर्शाती नितांत सारहीन कविता ।
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    Vikkey Uikey
    22 अगस्त 2019
    kafi dard bhara h. ...