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काँच का घर

4.2
31847

गर्मियों के दिन थे। मैंने और वन्दना ने उस छोटे से कस्बे में नयी-नयी प्रैक्टिस शुरू की थी। दरअसल मैं और वन्दना एक ही विश्वविद्यालय में पढ़े थे। वह एम-बी-बी-एस कर रही थी और मैं बी-ए-एम-एस- का छात्र...

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लेखक के बारे में
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Mukesh Sharma
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Kanta Gogia
    19 सितम्बर 2018
    बहुत अच्छी औऱ कड़वी हकीकत बयान करती हुई कहानी।
  • author
    19 सितम्बर 2018
    बिल्कुल लाजवाब कहानी
  • author
    मीना चौधरी "Saloni"
    21 सितम्बर 2018
    नई सोच और रोचकता लिये यह कहानी नये युग की कहानी है । मंगल कामनाएँ आदरणीय मुकेशजी ---मीना चौधरी
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    Kanta Gogia
    19 सितम्बर 2018
    बहुत अच्छी औऱ कड़वी हकीकत बयान करती हुई कहानी।
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    19 सितम्बर 2018
    बिल्कुल लाजवाब कहानी
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    मीना चौधरी "Saloni"
    21 सितम्बर 2018
    नई सोच और रोचकता लिये यह कहानी नये युग की कहानी है । मंगल कामनाएँ आदरणीय मुकेशजी ---मीना चौधरी