pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

ज्वार भाटा

5
12

चमचमाती रात में जब चंद्रमा पूर्ण यौवन पर छटा बिखेर‌ रहा होता शांत समुद्र‌ की लहरें मचल उठती अधीर हों उठती चंद्रमा का स्पृश पाने चूम लेने ऊंची और ऊंची उठती जाती चंद्रमा कहां हाथ आने‌ वाला थक हार कर ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Ashok Kansal

Nothing to show.Writing is not my profession it has become my hobby & passion .

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Balram Soni
    20 अप्रैल 2022
    बढ़िया बहुत ही शानदार रचना 🙏🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🙏
  • author
    Mrs Patil
    20 अप्रैल 2022
    व्वाह बहुत खूब बेहद खूबसूरत अंदाज एवं मनोरम लाजवाब प्रस्तुती
  • author
    Sushma Yadav
    20 अप्रैल 2022
    बहुत खूब 👌👌👌 सुप्रभात
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Balram Soni
    20 अप्रैल 2022
    बढ़िया बहुत ही शानदार रचना 🙏🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🙏
  • author
    Mrs Patil
    20 अप्रैल 2022
    व्वाह बहुत खूब बेहद खूबसूरत अंदाज एवं मनोरम लाजवाब प्रस्तुती
  • author
    Sushma Yadav
    20 अप्रैल 2022
    बहुत खूब 👌👌👌 सुप्रभात