pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

जंगल में बब्बर शेर भले ही एक रहता हो

5
14

जंगल में बब्बर शेर भले ही एक रहता हो, जो किसी से न डरता हो। मेरा जंगल आना-जाना कभी-कभार ही होता है- पर मजाल! मुझे देखकर बब्बर शेर रास्ता न बदलता हो।।       विष्णु कुमार 'पथिक' ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
vishnu kumar

मुझे बचपन से ही साहित्य की सभी विधाओं में रूचि रही है। मैंने सभी विधाओं में कुछ न कुछ अवश्य लिखा है परंतु कहानी और कविता मेरा मजबूत पक्ष है। मैं गीतकार तथा गायक भी हूं। अब तक मैंने 500 के लगभग गीत, 300 के लगभग कहानियां और छोटी कविता लगभग 2000 लिखीं हैं। मैं राजनीति में भी रह चुका हूं। मेरी पत्नी ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं। इस समय मैं जिला बहराइच  में शिक्षा विभाग में कार्यरत हूं।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    आशा रानी शरण
    18 जनवरी 2021
    वाह बहुत खूब बब्बर शेर रास्ता बदलता है धन्यवाद नमस्कार विष्णु जी बहुत बढ़िया लिखा आपने।
  • author
    Reeta Gupta "रश्मि"
    19 जनवरी 2021
    वाह क्या बात है? बब्बर शेर भी रास्ता छोड़ देता है? बहुत खूब
  • author
    Mamta Yadav
    18 जनवरी 2021
    अच्छा रुतबा । सुँदर
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    आशा रानी शरण
    18 जनवरी 2021
    वाह बहुत खूब बब्बर शेर रास्ता बदलता है धन्यवाद नमस्कार विष्णु जी बहुत बढ़िया लिखा आपने।
  • author
    Reeta Gupta "रश्मि"
    19 जनवरी 2021
    वाह क्या बात है? बब्बर शेर भी रास्ता छोड़ देता है? बहुत खूब
  • author
    Mamta Yadav
    18 जनवरी 2021
    अच्छा रुतबा । सुँदर