जिसने सूरज चांद बनाया, जिसने तारों को चमकाया. जिसने फूलों को महकाया, जिसने चिड़ियों को चहकाया. जिसने रची हमारी काया, जिसने सारा जगत बनाया. उसी ईश्वर को सदा माने, उसी प्रेम से शीश झुकाए. . ...
जीवन में सर्वप्रथम आप स्वयं से प्रेम करो, क्योंकि जब आप स्वयं से प्रेम करेंगे तभी किसी दूसरे से प्रेम कर सकते हो.
यदि व्यक्ति स्वयं का ध्यान नहीं रख सकता तो वह दूसरे का भला क्या ध्यान रखेगा.
सारांश
जीवन में सर्वप्रथम आप स्वयं से प्रेम करो, क्योंकि जब आप स्वयं से प्रेम करेंगे तभी किसी दूसरे से प्रेम कर सकते हो.
यदि व्यक्ति स्वयं का ध्यान नहीं रख सकता तो वह दूसरे का भला क्या ध्यान रखेगा.
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