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जिंदगी की किताब

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कैसे कहूं किसी को कोई हमको आ पढ़े, पढ़े जो भी अगर हमको वो दिल से पूरा पढ़े। हम कैसे मान ले हमने पृष्ठ पूरे नहीं लिखे, मेरे जो भी लिखे वो तो खुदा ने ही लिखे। जो पढ़ ना पाए मेरी लिखावट तो मैं क्या ...

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लेखक के बारे में

Life is a bond of false fascination. Hobby:writing, long drive, adventure, cooking, spiritual practice , ... MTech, MBA, MIE, President Award for best employee,

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    आरती शर्मा
    14 अप्रैल 2021
    कृष्णा बहुत सुंदर रचना है। पढ़ने का हुनर सीखना होगा, लिखने वाले के भाव तो समन्दर के सीप में छुपा मोतियों का अंबार है।।
  • author
    Kamal Kamini
    14 अप्रैल 2021
    मैं दिखूँ...न दिखूँ... बस मुझे अहसासों में महसूस करना...✍️✍️ मैं लिखूँ...न लिखूँ.... बस मुझे शब्दों में ही पढ़ लेना…✍️✍️
  • author
    Nutan V
    14 अप्रैल 2021
    क्या गज़ब का लिखते हैं आप तो, दम है लेखनी में 👌👌👌👌
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    आरती शर्मा
    14 अप्रैल 2021
    कृष्णा बहुत सुंदर रचना है। पढ़ने का हुनर सीखना होगा, लिखने वाले के भाव तो समन्दर के सीप में छुपा मोतियों का अंबार है।।
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    Kamal Kamini
    14 अप्रैल 2021
    मैं दिखूँ...न दिखूँ... बस मुझे अहसासों में महसूस करना...✍️✍️ मैं लिखूँ...न लिखूँ.... बस मुझे शब्दों में ही पढ़ लेना…✍️✍️
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    Nutan V
    14 अप्रैल 2021
    क्या गज़ब का लिखते हैं आप तो, दम है लेखनी में 👌👌👌👌