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जिंदगी के मुसाफिर

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मुसाफिर हूं मैं , क्योंकि तलाश है मुझे अपने वजूद की किसी को दिखे मेरा वजूद तो बताना शायद मुझे भी मेरी मंज़िल मिल जाए 🙂🙂 कब तक भटकती रहूंगी जिंदगी की राहों में आशियाना अपना भी जरूरी है मुझे ...

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लेखक के बारे में
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Unknown writer ✍️

मैं जज़्बात लिखती हूं.....❤️ आप अहसास पढ़िए......🥰 प्रतिलिपि पर आने का मक़सद अपनी कहानीयों के ज़रीये अपने रीडर्स के दिलों ❤️में जगह बनाने का हैं....🤗 बचपना बहुत हैं मुझ में 😜 मगर समझदार भी हुं 🙂 पागल सी हुं थोड़ी 😗 मगर बेपरवाह नहीं.……☺️ 13 जुन दुनिया में आई हुं, 🎂 और दुनिया से जाने का दिन 🤔 मुझे नही पता ? 😅 कुछ राज़ ऐसे दफ्न थे सीने में जो ना सहे जा रहे थे ,ना ही कहे जा रहे थे फिर क्या , कलम उठाया और लिख दिया कोरे कागज़ पे हाल -ए- दिल अपना सुकून भी मिल गया और, राज़ भी राज़ ही रह गया ।

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    Shabana Malik
    27 मार्च 2025
    very nice
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    Shabana Malik
    27 मार्च 2025
    very nice