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ज़िन्दगी

4.2
675

अब अजवाइन सी लगने लगी है ज़िन्दगी, जब तक ऐसे रखता हूँ सामान्य लगती है;और और जब ख़ुद में घुलाने की कोशिश करता हूँ कड़वी लगने लगती है । मूंगफली से लगते हैं अब ये लोग मुझे बस ऊपर से एक कठोर परत ही तो है,...

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लेखक के बारे में
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रोशन गुप्ता
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Adyasha Rutuparna
    27 जून 2020
    nice poem mera v ek baar padh lijiye nayi hoon bass 15 yrs ki
  • author
    Alok Ranjan
    01 दिसम्बर 2019
    बहुत ही सुंदर
  • author
    शुभम पंथ
    03 दिसम्बर 2018
    अच्छी कविता
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  • author
    Adyasha Rutuparna
    27 जून 2020
    nice poem mera v ek baar padh lijiye nayi hoon bass 15 yrs ki
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    Alok Ranjan
    01 दिसम्बर 2019
    बहुत ही सुंदर
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    शुभम पंथ
    03 दिसम्बर 2018
    अच्छी कविता