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जिंदा हूँ मैं

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रोज सुबह जल्दी बिना नहाए एटीम में लाइन लगाए जा रहे हो तुम तो जिंदा हो तुम ! देर रात को भी एटीएम के पास धक्के खा रहे हो तुम तो जिंदा हो तुम! अपनी फ्रैंड लिस्ट में से बैंकर तलाशे जा रहे हो तुम तो जिंदा...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ajay Agrawal
    11 अक्टूबर 2022
    बहुत सुन्दर जिंदा रहने की दास्तान
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    28 अप्रैल 2020
    सही भावना को दर्शाती हुई कविता
  • author
    सूरज आदित्य
    03 फ़रवरी 2021
    good observation
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  • author
    Ajay Agrawal
    11 अक्टूबर 2022
    बहुत सुन्दर जिंदा रहने की दास्तान
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    28 अप्रैल 2020
    सही भावना को दर्शाती हुई कविता
  • author
    सूरज आदित्य
    03 फ़रवरी 2021
    good observation