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जीवन-संघर्ष

4.6
9354

मेरी यह कहानी राजस्थान पत्रिका के परिवार परिशिष्ठ में 19.8.2015 को प्रकाशित हो चुकी है.

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लेखक के बारे में
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रेणु गुप्ता

नाम - श्रीमती रेणु गुप्ता शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी. एम. ए. (अंग्रेजी), सी. लिब. बी.एड. संप्रति - जयपुर के प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में पिछले 17 वर्षों से शिक्षिका के रूप में कार्यरत। लेखन - स्तरीय पत्र पत्रिकाओं तथा प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कहानियों तथा लेखों का निरंतर प्रकाशन। कई वार्ताएं आकाशवाणी, गुवाहाटी से प्रसारित परिवार तथा आत्मिक संबंधों से इतर मेरी दूसरी दुनिया है लेखन। अपने परिवेश में अपने अति संवेदनशील स्वभाव के चलते मैं जो कुछ गहराई से महसूस करती हूं, उन्हीं सामान्य पर मुझे असामान्य प्रतीत होतीं अनुभूतियों को लेखनी के माध्यम से कथा-कहानी के रूप में लिपिबद्ध करने का प्रयास करती रहती हूं। मेरे लिए इंसानी भावनाओं, अहसासों और जज्बातों को उकेरते हुए एक आम इंसान के इंद्रधनुषी जीवन के सातों रंगों को सक्षमता से अपनी कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करना किसी चुनौती से कम नहीं है और इस चुनौती का सामना करने की मुहिम मैं रोजाना लड़ती हूं। ई-मेल : renugupta2066@gmail.com

समीक्षा
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    Mandavi Barway
    20 जनवरी 2018
    आँखें नम हो गयीं, बहुत सुंदर लिखा है। जीते जी हुम् उस इंसान के गुणों की कद्र नही करते, उसके जाने के बाद अगरबत्तियां जलाने से क्या फायदा। मुझे मेरे पिताजी दिख रहे थे बाबूजी में। ठीक वैसे ही ईमानदार और सीधे स्वभाव के।
  • author
    Beena Awasthi
    30 सितम्बर 2019
    बहुत सुंदर कहानी। सिद्धांत पर चलने वाले व्यक्तियों को कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है। सबसे बड़ा विरोध घर से ही होता है, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं अच्छे कर्मों का अच्छा फल मिलता है।
  • author
    Meera Sajwan "मानवी"
    06 जून 2018
    जो जीवन मूल्यों को जीवित रखते हैं उन्हें जीवन में अनकौं संघर्ष का सामना करना ही पड़ता है।यथार्थ !!!
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    Mandavi Barway
    20 जनवरी 2018
    आँखें नम हो गयीं, बहुत सुंदर लिखा है। जीते जी हुम् उस इंसान के गुणों की कद्र नही करते, उसके जाने के बाद अगरबत्तियां जलाने से क्या फायदा। मुझे मेरे पिताजी दिख रहे थे बाबूजी में। ठीक वैसे ही ईमानदार और सीधे स्वभाव के।
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    Beena Awasthi
    30 सितम्बर 2019
    बहुत सुंदर कहानी। सिद्धांत पर चलने वाले व्यक्तियों को कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है। सबसे बड़ा विरोध घर से ही होता है, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं अच्छे कर्मों का अच्छा फल मिलता है।
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    Meera Sajwan "मानवी"
    06 जून 2018
    जो जीवन मूल्यों को जीवित रखते हैं उन्हें जीवन में अनकौं संघर्ष का सामना करना ही पड़ता है।यथार्थ !!!