pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

जीवन क्या

4
1331

जीवन क्या ? एक बहता दरिया जो हरदम बहता जाता है | थके मगर ये रुके कभी ना सारे गम सहता जाता है || जीवन क्या ? एक फांस है अन्दर जो सबके दिल में चुभती है | चाहे कितना कोई ढूरे ये सबके अन्दर रहती है ||...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

रणजीत प्रताप सिंह प्रतिलिपी के सह-संस्थापक हैं, उन्होने कमप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग एवम एम.बी.ए भी किया हुआ है। प्रतिलिपी से पहले वे सिटी बैंक(Citibank) एवम वोदाफोन(Vodafone) में काम कर चुके हैं। लेकिन इन सबसे अधिक वे अपने आप को एक पाठक के तौर पर पहचानते हैं, वे लेखक या रचनाकार बिल्कुल नहीं, लेकिन कभी कभी चंद पंक्तियां लिख देते हैं।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    meenakshi
    19 February 2017
    जीवन क्या है एक पहेली है
  • author
    कीर्ति "अनंत"
    28 January 2017
    jeevan kya behta dariya.....true
  • author
    Sushila Chanani
    24 August 2020
    कविता में जीवन को विभिन्न तरह से परिभाषित किया गया है जो कि अद्भुत है। कविता को थोड़ा तराश लिया जाता तो और धारदार हो जाती भाव और उभर कर आते!
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    meenakshi
    19 February 2017
    जीवन क्या है एक पहेली है
  • author
    कीर्ति "अनंत"
    28 January 2017
    jeevan kya behta dariya.....true
  • author
    Sushila Chanani
    24 August 2020
    कविता में जीवन को विभिन्न तरह से परिभाषित किया गया है जो कि अद्भुत है। कविता को थोड़ा तराश लिया जाता तो और धारदार हो जाती भाव और उभर कर आते!