इश्क़ मुकम्मल करने को, महबुब का साथ जरूरी तो नही। कभी जो देख लिया इन आंखों ने उन्हें, ये आँखें कुशुरी तो नहीं। बड़ा ही आसान होता है किसी को कह देना, भूल जाओ मुझे। मगर कहने मात्र से, मैं ...
बहुत अच्छा लिखे हो आप ..too good
but सर एक poet हम भी लिखे थे एक साल पहले उसका शीर्षक था ये जरुरी तो नही अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो हम सम्पादित कर सकते है हम प्रतिलिपि पर अभी ही आये है नये नये pls सुझाव दे
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