‘अरे माधव क्या हुआ मिल में अपनी पारी खत्म होते ही ठेकेदार से पैसे लेकर रेल की तरह छूटे जा रहे हो, हमारा इंतजार भी नहीं किया।’ धीरेन्द्र और राजू ने माधव को रोका। ‘कुछ नहीं भाई बस आज घर थोड़ा जल्दी जाना...
मर्मस्पर्शी छोटी कहानी से बहुत बड़ी गहरी बात कह दी आपने !
बहुत बहुत बधाई, बहुत ढैर सारी शुभकामनाएं...
"प्यार का एहसास" पढ़िएगा, प्रतिक्रिया के इन्तजार में....!
Hemant MOdh, "इन्दोरीलाल"
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