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जमापूंजी

4.5
12892

मोहल्ले की सारी औरतें इकट्ठा हो गई थीं माधुरी जी के न्यौते पर शाम की चाय पार्टी के लिए। बहुत जबरदस्त महफिल लगी थी बातों और ठहाकों की। जब से अपनी बेटी का जापा कटवा कर वे बरेली से दिल्ली वापस आईं ...

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लेखक के बारे में
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सीमा भाटिया

मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों पर गद्य और पद्य में लेखन

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Kamlesh Patni
    14 जनवरी 2020
    क्या करती माधुरी।सही किया उसने ।भूखों के पेट कभी भरते नहीं।बस रस्मों रिवाज के नाम पर चूसते रहो ।बात तब होती जब पति सास खुश होकर स्वयं सब खर्चा उठाते।बहुतसे ससुराल वाले तो आज भी इसी सोच में रहते हैं बेटी ब्याही है तो यह सब करना होगा।वह बेटी आपके परिवार को आगे बढ़ा रही है यह नहीं समझते।
  • author
    Sadhana Tiwari
    23 अगस्त 2018
    बहुत बढ़िया कहानी है अभी भी हर घर में यही होता है
  • author
    qazi asad
    23 अगस्त 2018
    sachcha waqea maloom hota hai. lekin likhne mein uljhao bahot hai. 'jama punji' achcha title hai. magar kahani ke climax mein madhuri se jo guftgu ki jati hai jiske jawab mein wo kehti hai k apni sari jama punji de aai to, I don't think rupees one lakh was her total asset. neither practical nor abstract. uljhao aur adhura pan hai climax mein bhi. aur saaf hoti to siidhe dil par lagti.
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    Kamlesh Patni
    14 जनवरी 2020
    क्या करती माधुरी।सही किया उसने ।भूखों के पेट कभी भरते नहीं।बस रस्मों रिवाज के नाम पर चूसते रहो ।बात तब होती जब पति सास खुश होकर स्वयं सब खर्चा उठाते।बहुतसे ससुराल वाले तो आज भी इसी सोच में रहते हैं बेटी ब्याही है तो यह सब करना होगा।वह बेटी आपके परिवार को आगे बढ़ा रही है यह नहीं समझते।
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    Sadhana Tiwari
    23 अगस्त 2018
    बहुत बढ़िया कहानी है अभी भी हर घर में यही होता है
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    qazi asad
    23 अगस्त 2018
    sachcha waqea maloom hota hai. lekin likhne mein uljhao bahot hai. 'jama punji' achcha title hai. magar kahani ke climax mein madhuri se jo guftgu ki jati hai jiske jawab mein wo kehti hai k apni sari jama punji de aai to, I don't think rupees one lakh was her total asset. neither practical nor abstract. uljhao aur adhura pan hai climax mein bhi. aur saaf hoti to siidhe dil par lagti.