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जल स्त्रोत

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जल स्त्रोत अब शुष्क सी हो गयी हैं आँखें नहीं उमड़ते उनमें सैलाब लगता है भावना शून्य हो गया है जज्बाती आँखों का तालाब सुख-दुःख दोनों का ही बारहमासी  स्रोत था जो ...

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लेखक के बारे में
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Meera Sajwan

मैं कोई लेखक नहीं हूँ मैं तो भावों को जीती हूँ।और जो भाव मन को छूले उसे कागज पर उकेर देती हूँँ। शब्द मेरे ख्वाब हैं जो तितलियों की भाँति मेरे चारों ओर हमेशा मंड़राते रहते हैं ।जब-जब मन प्रफुल्लित या उद्वेलित होता है तो कलम चल पड़ती है ।हाथ बढ़ाकर अक्षरो को बटोर शब्दों का गुलदस्ता बनाकर कागज रूपी गुलिस्तां में सजा देती हूँ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    02 अगस्त 2021
    चलो सब मिलकर उम्मीदों की जोत जलांए... उत्कृष्ट.
  • author
    Arunima Sajwan
    04 अगस्त 2021
    सार्थक सृजन 😊👌👌👌👌👌
  • author
    Neha Vyas
    30 जुलाई 2021
    सादर नमन 🙏 दीदी सार्थक सृजन 🙏💐
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    02 अगस्त 2021
    चलो सब मिलकर उम्मीदों की जोत जलांए... उत्कृष्ट.
  • author
    Arunima Sajwan
    04 अगस्त 2021
    सार्थक सृजन 😊👌👌👌👌👌
  • author
    Neha Vyas
    30 जुलाई 2021
    सादर नमन 🙏 दीदी सार्थक सृजन 🙏💐