नकारात्मक विसंगतियों को दूर करना हैसकारात्मक उत्कृष्ट सोच का देशभक्ति में रंग भरना है जला लो मशाल अंतःकरण में दिव्य चेतना की हो विभूषित मानवता संवेदना पर वेदना की न हो तिरस्कार किसी ममता की वेदी...
प्रकृति से बेहद प्यार करती हूं
सादगी से रिश्ता गहरा है
जज्बातों को दिल से निभाती हूं
खामोशी में खुद की तलाश में
शब्दों से रिश्ता गहरा है
दिल से दिल तक राहें हैं मेरी
मंजिल भी दिलों तक है
लेखन से प्यार है इतना
जैसे जिंदगी का रिश्ता
धड़कन से सांसों तक है
पूनम राठौर
सारांश
प्रकृति से बेहद प्यार करती हूं
सादगी से रिश्ता गहरा है
जज्बातों को दिल से निभाती हूं
खामोशी में खुद की तलाश में
शब्दों से रिश्ता गहरा है
दिल से दिल तक राहें हैं मेरी
मंजिल भी दिलों तक है
लेखन से प्यार है इतना
जैसे जिंदगी का रिश्ता
धड़कन से सांसों तक है
पूनम राठौर
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