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जादुई घोड़ा

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**************** **************** जादुई घोड़े जैसा है मन हमारा.. बिन चाबुक के ही सरपट दौड़ता.. हमारे रोके भी ये कभी ना रुकता.. यहाँ वहाँ की है सैर करता रहता.. इस पर लगाम लगाना है बेहद ...

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लेखक के बारे में
author
Madhavi Sharma

कल्पनाओं से परे.. यथार्थ के कठोर धरातल पर.. यथार्थ से ही रूबरू करवाने का एक छोटा सा प्रयास.. आपका स्नेह अपेक्षित है.. जय श्री कृष्ण 🙏💕

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अल्पज्ञ
    04 अप्रैल 2024
    बहुत गूढ़ विषय को सरलतम शब्दों में लेखनीबद्ध किया आपने। मन को जीतना बहुत ही दुष्कर परंतु असंभव भी नहीं है। चेतना को प्रकृति प्रवाह से विलग कर अर्ध से ऊर्ध्व गामी बना, किसी आप्त सदगुरु के अनन्य शरण हो कर,उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर मन को अपने वश में कर के आत्मज्ञान प्राप्त हो सकता है।
  • author
    Jyoti Bala Shrivastava
    04 अप्रैल 2024
    जादुई घोड़े की तरह तीव्र गामी अनियंत्रित गतिशील चंचल मन की गति को दृढ़ निश्चय की लगाम के द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है । सार्थक और सकारात्मक विचारों वाली बेहतरीन रचना है आपकी अपराजिता जी 🌹🙏🌹
  • author
    Ashok Kumar Pal
    04 अप्रैल 2024
    जादुई घोड़ा कहीं मन तो नहीं, इसकी लगाम बुद्धि और नियंत्रित करने वाली हमारी अंतरात्मा हैं। चंचल मन को नियंत्रित करना जरूरी है बहुत ही सुंदर और शानदार प्रस्तुति। 👌👌👌👌✍️
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    अल्पज्ञ
    04 अप्रैल 2024
    बहुत गूढ़ विषय को सरलतम शब्दों में लेखनीबद्ध किया आपने। मन को जीतना बहुत ही दुष्कर परंतु असंभव भी नहीं है। चेतना को प्रकृति प्रवाह से विलग कर अर्ध से ऊर्ध्व गामी बना, किसी आप्त सदगुरु के अनन्य शरण हो कर,उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर मन को अपने वश में कर के आत्मज्ञान प्राप्त हो सकता है।
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    Jyoti Bala Shrivastava
    04 अप्रैल 2024
    जादुई घोड़े की तरह तीव्र गामी अनियंत्रित गतिशील चंचल मन की गति को दृढ़ निश्चय की लगाम के द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है । सार्थक और सकारात्मक विचारों वाली बेहतरीन रचना है आपकी अपराजिता जी 🌹🙏🌹
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    Ashok Kumar Pal
    04 अप्रैल 2024
    जादुई घोड़ा कहीं मन तो नहीं, इसकी लगाम बुद्धि और नियंत्रित करने वाली हमारी अंतरात्मा हैं। चंचल मन को नियंत्रित करना जरूरी है बहुत ही सुंदर और शानदार प्रस्तुति। 👌👌👌👌✍️