pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

जब से मिले हो तुम ......

3.6
921

जब से मिले हो तुम मैं खोई रहती हूँ कुछ अनकहे और उलझे से कुछ सवालों के घेरे में जिनमें उलझना तो है आसान लेकिन जिन्हें सुलझाना है बहुत ही कठिन आखिर तुम्हारी इन आँखों कि चमक ने ही तो जन्म दिये हैं ना...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shilpi Manjari
    16 अक्टूबर 2019
    शब्द सयोजन सधा हुआ नही है पर भाव अच्छे हैं
  • author
    kripa Aditya
    11 नवम्बर 2018
    accha hai 👌👌👌
  • author
    Chintu bhaiya sisodiya ji
    28 सितम्बर 2018
    बहोत शानदार
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shilpi Manjari
    16 अक्टूबर 2019
    शब्द सयोजन सधा हुआ नही है पर भाव अच्छे हैं
  • author
    kripa Aditya
    11 नवम्बर 2018
    accha hai 👌👌👌
  • author
    Chintu bhaiya sisodiya ji
    28 सितम्बर 2018
    बहोत शानदार