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जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी

4.3
2290

जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी मौत का रोकने वाला कोई पैदा न हुआ उसकी बेटी ने उठा रक्खी है दुनिया सर पर ख़ैरियत गुज़री कि अंगूर के बेटा न हुआ ज़ब्त से काम लिया दिल ने तो क्या फ़ख़्र करूँ इसमें ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अकबर हुस्सैन रिज़वी उपनाम : अकबर अलाहाबादी जन्म : 16 नवंबर 1846 देहावसान: 15 फरवरी 1921 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल, शायरी अकबर अलाहाबादी उर्दू व्यंग्य के अग्रणी रचनाकारों में से एक हैं, इनके काफी शेरों एवम ग़ज़लों में सामाजिक दर्द को सरल भाषा में हास्यपूर्क ढंग से उकेरा गया है। "हंगामा है क्यूं बरपा" इनकी मशहूर ग़ज़लों में से एक है

समीक्षा
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  • author
    vajida sayyed
    07 अप्रैल 2020
    wha wha janab....angur ke beta na huwa🖤🖤
  • author
    11 जनवरी 2025
    बहुत खूब भैया बहुत खूब
  • author
    16 जुलाई 2022
    इसमें मतला क्यों नहीं है
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    vajida sayyed
    07 अप्रैल 2020
    wha wha janab....angur ke beta na huwa🖤🖤
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    11 जनवरी 2025
    बहुत खूब भैया बहुत खूब
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    16 जुलाई 2022
    इसमें मतला क्यों नहीं है