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जा वो है साहिल

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वो पहली बूंद थी बारिश की जो सीधे दर पर आई थी बूंदों ने सहम सहम कर तब कोई मीठी सी धुन सुनाई थी मदहोश हवाएं चलती झीनी घटाएं फैलीं रिम झिम रिम झिम होती बारिश है यह पहली मदहोश हवा का झोंका मुझसे ये...

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लेखक के बारे में
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Veerendra Singh

साहित्य प्रेमी मैं मुख्यतया अपनी शायरी में छिपी हुई कहानियां सामने रखता हूं और मेरा मकसद वाहवाही पाना नहीं बल्कि यह देखना होता है कि मैं कामयाब हो पाया या नहीं मैंने अपनी जिंदगी का एक लंबा समय शायरी में बिताया है और अंत में मैं एक नया लेखक हूं जिसके पास ग़ालिब की दी हुई हिदायत है और प्रेमचंद की दी हुई जागरुकता जय हिन्द 🇮🇳

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    15 जून 2026
    सुंदर रचना, लाजवाब पेशकश—दिल को छू लेने वाली अभिव्यक्ति! आपकी कलम की गहराई सच में काबिले-तारीफ है। मेरी विनम्र गुज़ारिश है कि मेरी रचना "मुस्ताक की आफरीन" भी ज़रूर पढ़ें और अपनी बहुमूल्य व निष्पक्ष समीक्षा देकर मार्गदर्शन करें। आपकी राय मेरे लिए बेहद अहम है। तहे दिल से शुक्रिया! 🙏
  • author
    Reena Bhanot "करिश्मा"
    15 जून 2026
    अति अति अति अति अति सुन्दर 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
  • author
    15 जून 2026
    good 👍
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    15 जून 2026
    सुंदर रचना, लाजवाब पेशकश—दिल को छू लेने वाली अभिव्यक्ति! आपकी कलम की गहराई सच में काबिले-तारीफ है। मेरी विनम्र गुज़ारिश है कि मेरी रचना "मुस्ताक की आफरीन" भी ज़रूर पढ़ें और अपनी बहुमूल्य व निष्पक्ष समीक्षा देकर मार्गदर्शन करें। आपकी राय मेरे लिए बेहद अहम है। तहे दिल से शुक्रिया! 🙏
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    Reena Bhanot "करिश्मा"
    15 जून 2026
    अति अति अति अति अति सुन्दर 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
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    15 जून 2026
    good 👍