इतना करीब आ के' वो' नूरे नज़र गया । कमरा ये मेरे जिस्म का' खुशबू से' भर गया ।। वो इक झलक में' रूह में' ऐसे उतर गया । जैसे गुबार-ए-रौशनी' शब में बिखर गया ।। कैसी दवा है' हुस्न,नशा ...

प्रतिलिपिइतना करीब आ के' वो' नूरे नज़र गया । कमरा ये मेरे जिस्म का' खुशबू से' भर गया ।। वो इक झलक में' रूह में' ऐसे उतर गया । जैसे गुबार-ए-रौशनी' शब में बिखर गया ।। कैसी दवा है' हुस्न,नशा ...