इस मोहब्बत के दिन आ चल मोहब्बत की एक नयी दासतान लिखते है हीर-रांझा लैला-मजनु जैसी तो बहुत हो गयी.. चल तेरी मेरी मोहब्बत की किस्से काहानियो की एक नायाब किताब लिखते है ...
मोहब्बत के वो दिन जब शिकवा दिल मे और शिकायत होठो पर होता था,
आज भी मोहब्बत है हमे आपसे फर्क सिर्फ इतना है आज ना दिल मे शिकवा है और ना होठो पर शिकायत.......बहुत खूब 👍👌
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