pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

नीयत (लघुकथा)

4.1
11164

“मैं तुम्हें अच्छा लगता हूँ ना” लड़की ब्लश करने लगी। “बताओं ना। प्लीज बोलो ना” “अरे यार मैं भी तुम्हें अच्छी लगती हूँ ना तभी तो हम मिल रहे हैं” “ये क्या बात हुई । पहले मैंने पूछा था ना । बताओ मैं ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
महिमा श्री

शिक्षा :- एम.सी.ए, एम जे. लेखन विधाएँ :- अतुकांत कविताएँ, ग़ज़ल, दोहें, कहानी, यात्रा-वृतांत, सामाजिक विषयों पर आलेख , समीक्षा साहित्यिक गतिविधियाँ:-एकल काव्यसंकलन अकुलाहटें मेरे मन की, अंजुमन प्रकाशन 2015, साझा काव्य संकलन “त्रिसुन्गंधी” , “परों को खोलते हुए-१”, “ सारांश समय का” , “काव्य सुगंध -2” “कविता अनवरत-3” में रचनाएँ शामिल, देश के विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में यथा सदानीरा, सप्तपर्णी, सुसम्भाव्य,आधुनिक साहित्य ,अंजुमन ,अटूटबंधन, खुशबू मेरे देश की, इ-पत्रिका- शब्द व्यंजना, जय-विजय आदि में रचनाएँ प्रकाशित, अंतर्जाल और गोष्ठीयों में साहित्य सक्रियता , सामाजिक कार्यों में सहभागिता सम्प्रति :पब्लिक सेक्टर में सात साल काम करने के बाद (मार्च २००७-अगस्त २०१४) वर्तमान में स्वतंत्र लेखन, पत्रकारिता , नई दिल्ली Blogs:www.mahimashree.blogspots.in  

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sushila Chanani
    04 ಜುಲೈ 2020
    आजकल युवा अपने कैरियर को लेकर बहुत सचेत हैं ।इसलिए शादियां देर से हो रही हैं एक नयी सोच अब प्रगतिशीलता के नाम पर उभर रही है कि उसके पहले मित्र बनकर या लिव इन रिलेशन शिप में रह कर शारीरिक संबंध बना लिये जायें । ये बिना जिम्मेदारी भोग है जिसके अक्सर भयंकर परिणाम होते हैं ।लडंकियो को इस मामले मे जागरूक होना चाहिए क्योंकि परिणाम उनको ही भोगने पड़ते हैं ।इसी भाव को इंगित करती है सामाजिक कहानी "नीयत"।
  • author
    Ankit Maharshi
    24 ಮಾರ್ಚ್ 2018
    ऐसे लड़के फिर भी ठीक है पर कुछ तो कमिटमेंट देने के बाद धोखा फ्री में देते हैं, उनका क्या?? सुंदर रचना।
  • author
    'सोच'
    13 ಜೂನ್ 2017
    क्षमाप्रार्थी हैं, किन्तु यह अच्छी कथावस्तु एक बेहतर कथा बन नहीं पायी। आपने जितने शब्दों में कथा लिखी उससे यह लघुकथा का रूप लेती हैं लेकिन मापदण्डों पर खरी नहीं उतरी। छोटी कहानी या कहानी यह है नहीं। बहरहाल अच्छी कथावस्तु पर शिल्प का कसाव अच्छा है। सादर
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sushila Chanani
    04 ಜುಲೈ 2020
    आजकल युवा अपने कैरियर को लेकर बहुत सचेत हैं ।इसलिए शादियां देर से हो रही हैं एक नयी सोच अब प्रगतिशीलता के नाम पर उभर रही है कि उसके पहले मित्र बनकर या लिव इन रिलेशन शिप में रह कर शारीरिक संबंध बना लिये जायें । ये बिना जिम्मेदारी भोग है जिसके अक्सर भयंकर परिणाम होते हैं ।लडंकियो को इस मामले मे जागरूक होना चाहिए क्योंकि परिणाम उनको ही भोगने पड़ते हैं ।इसी भाव को इंगित करती है सामाजिक कहानी "नीयत"।
  • author
    Ankit Maharshi
    24 ಮಾರ್ಚ್ 2018
    ऐसे लड़के फिर भी ठीक है पर कुछ तो कमिटमेंट देने के बाद धोखा फ्री में देते हैं, उनका क्या?? सुंदर रचना।
  • author
    'सोच'
    13 ಜೂನ್ 2017
    क्षमाप्रार्थी हैं, किन्तु यह अच्छी कथावस्तु एक बेहतर कथा बन नहीं पायी। आपने जितने शब्दों में कथा लिखी उससे यह लघुकथा का रूप लेती हैं लेकिन मापदण्डों पर खरी नहीं उतरी। छोटी कहानी या कहानी यह है नहीं। बहरहाल अच्छी कथावस्तु पर शिल्प का कसाव अच्छा है। सादर