चारो तरफ लुटेरे है;
अब और नहीं शैतान चाहिये,
अपनी मातृभूमि पर मुझको अब केवल इंसान चाहिए।
चारो ओरे है गुंडागर्दी ;
अब और न गुंडा राज चाहिए ,
अपनी मातृभूमि पर मुझको अब केवल इंसान चाहिए।
भाई भाई के खून...
उपनाम -"वेंणी"
शिक्षा -b.com (c.a.)
m.a(english)
जन्म तिथि-1/2/1993(आयु 22 वर्ष)
प्रकाशित रचनाएँ--लघुकथाएँ,कवितायेँ एवं लेख देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित
(रचना प्रकाशित अखबारो के नाम-दैनिक भास्कर सतना प्लस, जनसंदेस ,राजस्थान पत्रिका "सृजन" ,भोपाल लोकजंग ,झाँसी लोकमत एवं महानगर मेल मुम्बई आदि )
सारांश
उपनाम -"वेंणी"
शिक्षा -b.com (c.a.)
m.a(english)
जन्म तिथि-1/2/1993(आयु 22 वर्ष)
प्रकाशित रचनाएँ--लघुकथाएँ,कवितायेँ एवं लेख देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित
(रचना प्रकाशित अखबारो के नाम-दैनिक भास्कर सतना प्लस, जनसंदेस ,राजस्थान पत्रिका "सृजन" ,भोपाल लोकजंग ,झाँसी लोकमत एवं महानगर मेल मुम्बई आदि )
" चारो ओरे " जैसे शब्दराष्ट्र भाषा हिंदी पर पकड़ दर्शा रहे है ।मूलभूत मात्रा तक के ज्ञान का अभाव है । राष्ट्र भाषा का अपमान ( hurt) करती नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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" चारो ओरे " जैसे शब्दराष्ट्र भाषा हिंदी पर पकड़ दर्शा रहे है ।मूलभूत मात्रा तक के ज्ञान का अभाव है । राष्ट्र भाषा का अपमान ( hurt) करती नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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