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इंसान चाहिए

4.3
740

चारो तरफ लुटेरे है; अब और नहीं शैतान चाहिये, अपनी मातृभूमि पर मुझको अब केवल इंसान चाहिए। चारो ओरे है गुंडागर्दी ; अब और न गुंडा राज चाहिए , अपनी मातृभूमि पर मुझको अब केवल इंसान चाहिए। भाई भाई के खून...

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लेखक के बारे में

उपनाम -"वेंणी" शिक्षा -b.com (c.a.)  m.a(english) जन्म तिथि-1/2/1993(आयु 22 वर्ष) प्रकाशित रचनाएँ--लघुकथाएँ,कवितायेँ एवं लेख देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित  (रचना प्रकाशित अखबारो के नाम-दैनिक भास्कर सतना प्लस, जनसंदेस ,राजस्थान पत्रिका "सृजन" ,भोपाल लोकजंग ,झाँसी लोकमत एवं महानगर मेल मुम्बई आदि )

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    piya parihar
    12 अक्टूबर 2015
    sahi kaha ab kewal insaan chahiye jo is desh ko wapas se sone ki chidiya bana sake  
  • author
    ASHA ghanchi
    23 मई 2021
    achhi rachna h
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    12 अक्टूबर 2015
    " चारो ओरे " जैसे शब्दराष्ट्र भाषा हिंदी पर पकड़ दर्शा रहे है ।मूलभूत मात्रा तक के ज्ञान का अभाव है । राष्ट्र भाषा का अपमान ( hurt) करती नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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    piya parihar
    12 अक्टूबर 2015
    sahi kaha ab kewal insaan chahiye jo is desh ko wapas se sone ki chidiya bana sake  
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    ASHA ghanchi
    23 मई 2021
    achhi rachna h
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    12 अक्टूबर 2015
    " चारो ओरे " जैसे शब्दराष्ट्र भाषा हिंदी पर पकड़ दर्शा रहे है ।मूलभूत मात्रा तक के ज्ञान का अभाव है । राष्ट्र भाषा का अपमान ( hurt) करती नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।