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इन्सान और जानवर

4.5
2091

रात के करीब एक बजे ..डिपो के लोहे के काफी बड़े दरवाजे के सामने बहुत सारे कुत्तों की भीड़ लगी थी.. सभी गेट की तरफ मुंह करके जोर जोर से भौंक रहे थे । ध्यान से देखने पर ज्ञात हुआ कि एक कुत्ते की ...

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लेखक के बारे में

डॉ अनुराधा शर्मा -- शिक्षा  - हिन्दी व इतिहास में एम.ए. , बी. एड. ,           एम.एड. ,पीएच.डी. , संगीत प्रभाकर ( गायन ) पुरस्कार व सम्मान-- दिल्ली शिक्षा निदेशालय की और से 'प्रतिभांजलि पुरस्कार' (२००५से २००८तक) ,  तथा सर्वश्रेष्ठ राज्य शिक्षक पुरस्कार (२०११) अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आगमन समुह द्वारा 'तेजस्विनी अवॉर्ड '( २०१७) प्रकाशन - कईं पुस्तकें ,कईं साझा संग्रह में रचनाएँ प्रकाशित तथा अन्य पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, ऑनलाइन प्रकाशन--  अनेक रचनाएँ प्रकाशित अनेक सेमिनार में भागीदारी के साथ अनेक बार शैक्षिक सेमिनार्स में रिसॉर्स पर्सन । अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म फैस्टिवल दिल्ली ( २०११)में कला प्रदर्शनी में भागीदारी, वर्तमान में जुलाई २०२१ से वित्त मंत्रालय,दिल्ली में एकल कला प्रदर्शनी लगी है तीन महीने के लिए। एक एनजीओ का संचालन। सम्प्रति- उपप्रधानाचार्या- दिल्ली शिक्षा निदेशालय ।

समीक्षा
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  • author
    🔆
    10 ଅକ୍ଟୋବର 2020
    सही कहा जी
  • author
    Savita Ojha
    02 ଜୁନ 2020
    बहुत ही सुन्दर संदेश दिया कहानी के माध्यम से बेहतरीन अभिव्यक्ति
  • author
    Rohit kumar Singh
    20 ଅପ୍ରେଲ 2020
    बहुत बढिया,यही है लघुकथा,और संदेशवाहक भी
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    🔆
    10 ଅକ୍ଟୋବର 2020
    सही कहा जी
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    Savita Ojha
    02 ଜୁନ 2020
    बहुत ही सुन्दर संदेश दिया कहानी के माध्यम से बेहतरीन अभिव्यक्ति
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    Rohit kumar Singh
    20 ଅପ୍ରେଲ 2020
    बहुत बढिया,यही है लघुकथा,और संदेशवाहक भी