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ईमानदारी

4.3
2963

उसकी बच्ची को चूड़ियां पसंद आ गईं तो उसने दुकानदार से मोलभाव करना चाहा मगर दुकानदार ने एक रुपया भी कम नहीं किया। चूड़ियों के तीस रुपये देने के लिये उसने पचास रुपये का नोट दुकानदार को दिया।दुकानदार ने ...

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लेखक के बारे में

पलोटन गंज ,गाडरवारा, जिला -नरसिंहपुर म.प्र. मोबा.9993278808

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    मनमोहन कौशिक
    04 सितम्बर 2017
    बढ़िया कथा।हम बच्चों को जैसा बनाते हैं बच्चे वैसे ही बन जाते हैं,यह सत्य है।भौतिकता की अंधी दौड़ हमे बहार से सम्पन बना रही है भीतर से विपन्न।
  • author
    Madhurima Srivastava
    17 सितम्बर 2022
    इन छोटी छोटी बातों से आदर्श प्रस्तुत कर बच्चों को नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए।
  • author
    Satendra Kumar Gupta
    24 अप्रैल 2020
    एक अच्छी शिक्षा
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    मनमोहन कौशिक
    04 सितम्बर 2017
    बढ़िया कथा।हम बच्चों को जैसा बनाते हैं बच्चे वैसे ही बन जाते हैं,यह सत्य है।भौतिकता की अंधी दौड़ हमे बहार से सम्पन बना रही है भीतर से विपन्न।
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    Madhurima Srivastava
    17 सितम्बर 2022
    इन छोटी छोटी बातों से आदर्श प्रस्तुत कर बच्चों को नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए।
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    Satendra Kumar Gupta
    24 अप्रैल 2020
    एक अच्छी शिक्षा