pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

आइडेंटिटी

4.3
2788

छोटी-छोटी प्लास्टिक की शीशियों में होमियोपैथी की गोलियों को भरती हुई संगीता मुझे एकदम अनजान लगी. “मैडम, तीन-तीन गोलियां एक साथ दोनों शीशियों से दिन में दो बार याद करके ले लीजिएगा. भूलिएगा नहीं. और यह ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

जन्म - कलकता मातृभाषा - बंगला शिक्षा - एम.ए. (हिंदी), पी.एच.डी.(महाराजा सयाजी राव युनिवर्सिटी,वडोदरा), बी.एड. (भारतीय शिक्षा परिषद, यु.पी.) लेखन - हिंदी, बंगला, गुजराती, ओडीया, अँग्रेजी भाषाओं के ज्ञान के कारण आनुवाद कार्य में संलग्न। स्वरचित कहानी, आलोचना, कविता, लेख आदि हंस (दिल्ली), वागर्थ (कलकता), समकालीन भारतीय साहित्य (दिल्ली), कथाक्रम (दिल्ली), नव भारत (भोपाल), शैली (बिहार), संदर्भ माजरा (जयपुर), शिवानंद वाणी (बनारस), दैनिक जागरण (कानपुर), दक्षिण समाचार (हैदराबाद), नारी अस्मिता (बडौदा), पहचान (दिल्ली), भाषासेतु (अहमदाबाद) आदि प्रतिष्ठित पत्र – पत्रिकाओं में प्रकशित। “गुजरात में हिन्दी साहित्य का इतिहास” के लेखन में सहायक। प्रकाशन - “मध्यकालीन हिंदी गुजराती साखी साहित्य” (शोध ग्रंथ-1998), “किसे पुकारुँ?”(कहानी संग्रह – 2000), “मोड पर” (कहानी संग्रह – 2001), “नारी चेतना” (आलोचना – 2001), “अबके बिछ्डे ना मिलै” (कहानी संग्रह – 2004), “किसे पुकारुँ?” (गुजराती भाषा में आनुवाद -2008), “बाहर वाला चेहरा” (कहानी संग्रह-2013), “सुरभी” बांग्ला कहानियों का हिन्दी अनुवाद – प्रकाशित, “स्वप्न दुःस्वप्न” तथा “मेमरी लेन” (चिनु मोदी के गुजराती नाटकों का अनुवाद शीघ्र प्रकाश्य), “गुजराती लेखिकाओं नी प्रतिनिधि वार्ताओं” का हिन्दी में अनुवाद (शीघ्र प्रकाश्य), “बांग्ला नाटय साहित्य तथा रंगमंच का संक्षिप्त इति.” (शिघ्र प्रकाश्य)। उपलब्धियाँ - हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा वर्ष 2000 में शोध ग्रंथ “साखी साहित्य” प्रथम पुरस्कृत, गुजरात साहित्य परिषद द्वारा 2000 में स्वरचित कहानी “मुखौटा” द्वितीय पुरस्कृत, हिंदी साहित्य अकादमी गुजरात द्वारा वर्ष 2002 में स्वरचित कहानी संग्रह “किसे पुकारुँ?” को कहानी विधा के अंतर्गत प्रथम पुरस्कृत, केन्द्रिय हिंदी निदेशालय द्वारा कहानी संग्रह “किसे पुकारुँ?” को अहिंदी भाषी लेखकों को पुरस्कृत करने की योजना के अंतर्गत माननीय प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयीजी के हाथों प्रधान मंत्री निवास में प्र्शस्ति पत्र, शाल, मोमेंटो तथा पचास हजार रु. प्रदान कर 30-04-2003 को सम्मानित किया। वर्ष 2003 में साहित्य अकादमि गुजरात द्वारा पुस्तक “मोड पर” को कहानी विधा के अंतर्गत द्वितीय पुरस्कृत। अन्य उपलब्धियाँ - आकशवाणी (अहमदाबाद-वडोदरा) को वार्ताकार। टी.वी. पर साहित्यिक पुस्तकों क परिचय कराना।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    मधु सोसी
    02 मई 2019
    आपकी कहानी पढ़ी मन को छू गई बस ये उड़ान कहानी में ही रह जाती है वास्तविकता का धरातल बड़ा कठोर होता है , चाह कर भी घर का ताला बंद नहीं हो पाता और फिर वोही समझौते की ज़िंदगी , रचना पर स्टार अधिक देने थे पर पता नहीं स्टार पर क्लिक करते ही उड़ गया अत: रचना पर चार स्टार तो बनते हैं आपको बधाई
  • author
    Poonam Garg
    28 फ़रवरी 2019
    कहानी अच्छी लगी सच में अपनी खुद की पहचान होनी चाहिए
  • author
    Shourabh Prabhat
    13 फ़रवरी 2019
    बेहतरीन कथानक..... कृपया मेरी रचनाओं पर भी अपनी राय दें
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    मधु सोसी
    02 मई 2019
    आपकी कहानी पढ़ी मन को छू गई बस ये उड़ान कहानी में ही रह जाती है वास्तविकता का धरातल बड़ा कठोर होता है , चाह कर भी घर का ताला बंद नहीं हो पाता और फिर वोही समझौते की ज़िंदगी , रचना पर स्टार अधिक देने थे पर पता नहीं स्टार पर क्लिक करते ही उड़ गया अत: रचना पर चार स्टार तो बनते हैं आपको बधाई
  • author
    Poonam Garg
    28 फ़रवरी 2019
    कहानी अच्छी लगी सच में अपनी खुद की पहचान होनी चाहिए
  • author
    Shourabh Prabhat
    13 फ़रवरी 2019
    बेहतरीन कथानक..... कृपया मेरी रचनाओं पर भी अपनी राय दें