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हमारा चाँद

4.4
14525

वो रोज़ की तरह ही ऑफ़िस आई और अपनी डेस्क पर चली गयी. आज भी बिना कुछ बोले.. माना हम अलग हुए हैं , पर अलगाव के बाद से वो इस तरह मुझे अनदेखा करती रही है जैसे मैं हूँ ही नहीं.. उसका ये व्यवहार मुझे ...

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लेखक के बारे में

शिक्षा: एम.ए. (इतिहास) सम्प्रति: सहायक अध्यापक (बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश) ©सर्वाधिकार सुरक्षित

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    03 जून 2020
    आदर्श समाज की परिकल्पना शायद आपकी कहानी में है। संबंधों में संतुलन जरूरी है। और इस स्पेस! भी एक सुंदर रचना, धन्यवाद।
  • author
    Neha Thakur
    11 सितम्बर 2018
    osm story sidha dil ko chu liya
  • author
    09 मई 2018
    बहुत खूबसूरत...आपकी कहानी के आधे चाँद को मैने अपनी आँखों के आधे चाँद को मिलाकर पढा.. बहुत प्यारा लगा... बहुत खूबसूरती से प्रेम की कसक को समेटा है ..और हाँ महकता आँचल में मैं कई बार छप चुका हूँ । उसमें कई बार इनामी खत किताबत में इनाम लिया... 97 में...
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    03 जून 2020
    आदर्श समाज की परिकल्पना शायद आपकी कहानी में है। संबंधों में संतुलन जरूरी है। और इस स्पेस! भी एक सुंदर रचना, धन्यवाद।
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    Neha Thakur
    11 सितम्बर 2018
    osm story sidha dil ko chu liya
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    09 मई 2018
    बहुत खूबसूरत...आपकी कहानी के आधे चाँद को मैने अपनी आँखों के आधे चाँद को मिलाकर पढा.. बहुत प्यारा लगा... बहुत खूबसूरती से प्रेम की कसक को समेटा है ..और हाँ महकता आँचल में मैं कई बार छप चुका हूँ । उसमें कई बार इनामी खत किताबत में इनाम लिया... 97 में...