वो रोज़ की तरह ही ऑफ़िस आई और अपनी डेस्क पर चली गयी. आज भी बिना कुछ बोले.. माना हम अलग हुए हैं , पर अलगाव के बाद से वो इस तरह मुझे अनदेखा करती रही है जैसे मैं हूँ ही नहीं.. उसका ये व्यवहार मुझे ...
बहुत खूबसूरत...आपकी कहानी के आधे चाँद को मैने अपनी आँखों के आधे चाँद को मिलाकर पढा.. बहुत प्यारा लगा... बहुत खूबसूरती से प्रेम की कसक को समेटा है ..और हाँ महकता आँचल में मैं कई बार छप चुका हूँ । उसमें कई बार इनामी खत किताबत में इनाम लिया... 97 में...
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बहुत खूबसूरत...आपकी कहानी के आधे चाँद को मैने अपनी आँखों के आधे चाँद को मिलाकर पढा.. बहुत प्यारा लगा... बहुत खूबसूरती से प्रेम की कसक को समेटा है ..और हाँ महकता आँचल में मैं कई बार छप चुका हूँ । उसमें कई बार इनामी खत किताबत में इनाम लिया... 97 में...
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