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हे तथागत

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हे तथागत मानवता के संवाहक कोटिश: नमन। आज भी वह 'बोधि वृक्ष' तुम्हारे तप की दिव्यता से आलोकित है। अब भी बौद्ध स्तूप, शिलाएँ से प्रस्फुटित होता तुम्हारा सन्देश फैला हुआ है चतुर्दिक महा परिनिर्माण ...

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लेखक के बारे में

लेखन मेरे लिए खुद को अभिव्यक्त करने का सशक्त और बेहतरीन माध्यम है। अभिव्यक्ति की इस आज़ादी में जहाँ आनंद के क्षण सुरभित होते हैं वहीँ भीतर की निराशा, दुःख व अवसाद की कड़ियाँ खुलने लगती हैं। मूलतः कविता, कहानी व् लेख रचना में निरंतरता। 'कादम्बनी','अहा ज़िन्दगी'व 'दैनिक जागरण' मे रचनाओं का प्रकाशन व पूर्व में आकाशवाणी गोरखपुर से रचनाओं का प्रसारण। साझा संग्रह 'ज़िन्दगी- कभी धूप कभी छाव' में कविताओं की साझेदारी।

समीक्षा
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  • author
    Akash Dwivedi
    22 जनवरी 2021
    very nice
  • author
    Balvindar singh Waraich
    12 जनवरी 2021
    very nice
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    Akash Dwivedi
    22 जनवरी 2021
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    Balvindar singh Waraich
    12 जनवरी 2021
    very nice