हे तथागत मानवता के संवाहक कोटिश: नमन। आज भी वह 'बोधि वृक्ष' तुम्हारे तप की दिव्यता से आलोकित है। अब भी बौद्ध स्तूप, शिलाएँ से प्रस्फुटित होता तुम्हारा सन्देश फैला हुआ है चतुर्दिक महा परिनिर्माण ...
लेखन मेरे लिए खुद को अभिव्यक्त करने का सशक्त और बेहतरीन माध्यम है।
अभिव्यक्ति की इस आज़ादी में जहाँ आनंद के क्षण सुरभित होते हैं वहीँ भीतर की निराशा, दुःख व अवसाद की कड़ियाँ खुलने लगती हैं।
मूलतः कविता, कहानी व् लेख रचना में निरंतरता।
'कादम्बनी','अहा ज़िन्दगी'व 'दैनिक जागरण' मे रचनाओं का प्रकाशन व पूर्व में आकाशवाणी गोरखपुर से रचनाओं का प्रसारण।
साझा संग्रह 'ज़िन्दगी- कभी धूप कभी छाव' में कविताओं की साझेदारी।
सारांश
लेखन मेरे लिए खुद को अभिव्यक्त करने का सशक्त और बेहतरीन माध्यम है।
अभिव्यक्ति की इस आज़ादी में जहाँ आनंद के क्षण सुरभित होते हैं वहीँ भीतर की निराशा, दुःख व अवसाद की कड़ियाँ खुलने लगती हैं।
मूलतः कविता, कहानी व् लेख रचना में निरंतरता।
'कादम्बनी','अहा ज़िन्दगी'व 'दैनिक जागरण' मे रचनाओं का प्रकाशन व पूर्व में आकाशवाणी गोरखपुर से रचनाओं का प्रसारण।
साझा संग्रह 'ज़िन्दगी- कभी धूप कभी छाव' में कविताओं की साझेदारी।
रिपोर्ट की समस्या
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