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हर शाख पर उल्लू बैठा है🙂

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हर तरफ जहां भी नजर जाती है... कहीं लोग मर रहे हैं तो कहीं जिंदगी की दुआएं कर रहे हैं।पर इस खौफनाक मंजर से परे कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनको इस माहौल में भी पैसे कमाने हैं।न तो उन्हें इंसानियत की फ़िक्र है ...

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लेखक के बारे में
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Mridula Kumari

खुशियां आसपास हैं बिखरी हुई फिर भी गमों का मजमूं है दुनिया खामखां ही उदास रहते हैं सब शायद ही कभी पुरसुकून हो दुनिया 🙏

समीक्षा
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  • author
    11 मई 2021
    अब क्या कहे मृदुला ज़ी,, इंसानियत मर गई है लोगों की,, जिन मानवीय मूल्यों की हम मिसालें दिया करते थे, आज वो सड़ गल गए हैं,,,, लाशों को नोचकर बस पैसा बनाने मे लगे हैं,,, धिक्कार है ऐसे लोगों पर,, ख़ैर लिखना तो बहुत कुछ चाहता हूं,, पर मन सही नहीं है,, आसपास के माहौल को देखकर बस रोना आता है,, आपकी रचना पढ़ी तो कुछ हौसला मिला,, ऐसे ही सुंदर सुंदर लिखते रहिए,, 🙏💐🙏
  • author
    Manju Singh "Chandel"
    11 मई 2021
    कुछ लोग सच्ची सेवा कर इंसानियत का मिसाल पेश कर रहें हैं... तो कुछ लोगों में हैवानियत इस कदर सवार हो गई कि इंसानियत का ही सौदा कर रहे हैं.. उनकी आत्मा मर चुकी है😪 आपने बिल्कुल सच वयां किया मृदुला जी,इस कठिन परिस्थितियों में हमें एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए,अपनी सुरक्षा करते हुए हर सम्भव मदद करनी चाहिए........
  • author
    Seema Arya "सीमा"
    11 मई 2021
    सही कहा आपने मृदुला जी ......इन संवेदनशील परिस्थितियों में भी लोग एक दूसरे की मजबूरी का फायदा उठाने में लगे हुए हैं.... ये लोग ऐसे उल्लू हैं जो अपने साथ साथ अपनों की ही शाख काटकर उन्हें मौंत के मुंह में धकेल रहे हैं .....।
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    11 मई 2021
    अब क्या कहे मृदुला ज़ी,, इंसानियत मर गई है लोगों की,, जिन मानवीय मूल्यों की हम मिसालें दिया करते थे, आज वो सड़ गल गए हैं,,,, लाशों को नोचकर बस पैसा बनाने मे लगे हैं,,, धिक्कार है ऐसे लोगों पर,, ख़ैर लिखना तो बहुत कुछ चाहता हूं,, पर मन सही नहीं है,, आसपास के माहौल को देखकर बस रोना आता है,, आपकी रचना पढ़ी तो कुछ हौसला मिला,, ऐसे ही सुंदर सुंदर लिखते रहिए,, 🙏💐🙏
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    Manju Singh "Chandel"
    11 मई 2021
    कुछ लोग सच्ची सेवा कर इंसानियत का मिसाल पेश कर रहें हैं... तो कुछ लोगों में हैवानियत इस कदर सवार हो गई कि इंसानियत का ही सौदा कर रहे हैं.. उनकी आत्मा मर चुकी है😪 आपने बिल्कुल सच वयां किया मृदुला जी,इस कठिन परिस्थितियों में हमें एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए,अपनी सुरक्षा करते हुए हर सम्भव मदद करनी चाहिए........
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    Seema Arya "सीमा"
    11 मई 2021
    सही कहा आपने मृदुला जी ......इन संवेदनशील परिस्थितियों में भी लोग एक दूसरे की मजबूरी का फायदा उठाने में लगे हुए हैं.... ये लोग ऐसे उल्लू हैं जो अपने साथ साथ अपनों की ही शाख काटकर उन्हें मौंत के मुंह में धकेल रहे हैं .....।