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हर निगाह चमक, हरेक होठ, हँसी ले के आओ

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हर निगाह चमक, हरेक होठ, हँसी ले के आओ हो सके तो, कमजर्फो के लिए, जिंदगी ले के आओ इस अँधेरे में दो कदम, न तुम चल सकोगे, न हम धुधली सही ,समझौते की मगर , रोशनी ले के आओ कुछ अपनी, हम चला सकें, कुछ दूर ...

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लेखक के बारे में
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सुशील यादव

जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़ रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर , कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Subhash Chander Bajaj
    02 फ़रवरी 2024
    nice poetry
  • author
    19 जुलाई 2023
    बहुत बढ़िया 👌🏻🙏🏻
  • author
    Akash Rana
    10 अगस्त 2018
    bahut khoob..
  • author
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Subhash Chander Bajaj
    02 फ़रवरी 2024
    nice poetry
  • author
    19 जुलाई 2023
    बहुत बढ़िया 👌🏻🙏🏻
  • author
    Akash Rana
    10 अगस्त 2018
    bahut khoob..