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हर हर गंगे

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बड़ा निर्मल गंगा का जल समाए हैं इसमें कई गुण, लगाकर इसमें एक डुबकी दूर हो जाते कई अवगुण,,,,, मिला इसको माँ का दर्जा हिमालय खड़ा इसी की गोद, बुझाए जन जन की यह प्यास ज्ञान का होता इससे बोध,,,,, ...

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लेखक के बारे में
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पवन सिंह

सत्य को स्वीकारने में बड़ा ही आनंद है ।अपने देश, दोस्तों तथा दिल की जरूर सुनो ।मस्त रहो, व्यस्त रहो।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Umashanker Agnihotri
    27 जून 2021
    वाह... वाह..... वाह.... बहुत सुन्दर एवं एक मनोहारी चित्रण।मजा आ गया।
  • author
    27 जून 2021
    जय मां गंगे🙏🙏🙏
  • author
    Naina.....✍️✍️....."Neelam"
    27 जून 2021
    सुंदर रचना आपकी
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    Umashanker Agnihotri
    27 जून 2021
    वाह... वाह..... वाह.... बहुत सुन्दर एवं एक मनोहारी चित्रण।मजा आ गया।
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    27 जून 2021
    जय मां गंगे🙏🙏🙏
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    Naina.....✍️✍️....."Neelam"
    27 जून 2021
    सुंदर रचना आपकी