हम नहीं तुम्हारी किस्मत में तुमने ये कहा चलते चलते पर बात नहीं थी किस्मत की किस्मत को तो हम ही बुनते ये तो बस एक बहाना था जो बना गए चलते चलते हम नहीं तुम्हारी.......... है सच था प्यार नहीं हमसे बस ...
हम नहीं तुम्हारी किस्मत में
ये तुमने कहा चलते चलते
पर ये तुम भूल गई
कितनी बार हमने किस्मत को पछाड़ा था ।
जो स्वपन भर थे आंखो के
उस रंग महल को हमने ही
किस्मत से ही जूझ सवारा था ।
क्या भूल गई तुम
रक्त रजित माटी पर हमने ही
प्रेम पुष्प खिलाया था ।
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ये तुमने कहा चलते चलते
पर ये तुम भूल गई
कितनी बार हमने किस्मत को पछाड़ा था ।
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उस रंग महल को हमने ही
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