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हम नहीं तुम्हारी किस्मत में

4.2
541

हम नहीं तुम्हारी किस्मत में तुमने ये कहा चलते चलते पर बात नहीं थी किस्मत की किस्मत को तो हम ही बुनते ये तो बस एक बहाना था जो बना गए चलते चलते हम नहीं तुम्हारी.......... है सच था प्यार नहीं हमसे बस...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    29 ਮਈ 2020
    हम नहीं तुम्हारी किस्मत में ये तुमने कहा चलते चलते पर ये तुम भूल गई कितनी बार हमने किस्मत को पछाड़ा था । जो स्वपन भर थे आंखो के उस रंग महल को हमने ही किस्मत से ही जूझ सवारा था । क्या भूल गई तुम रक्त रजित माटी पर हमने ही प्रेम पुष्प खिलाया था ।
  • author
    Jai Sharma
    19 ਅਪ੍ਰੈਲ 2020
    प्रभात आपकी कविता अच्छी थी धाराप्रवाह पढ़ता गया । धन्यवाद
  • author
    मीना मल्लवरपु
    10 ਅਕਤੂਬਰ 2019
    a good way to look at the issue!
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    29 ਮਈ 2020
    हम नहीं तुम्हारी किस्मत में ये तुमने कहा चलते चलते पर ये तुम भूल गई कितनी बार हमने किस्मत को पछाड़ा था । जो स्वपन भर थे आंखो के उस रंग महल को हमने ही किस्मत से ही जूझ सवारा था । क्या भूल गई तुम रक्त रजित माटी पर हमने ही प्रेम पुष्प खिलाया था ।
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    Jai Sharma
    19 ਅਪ੍ਰੈਲ 2020
    प्रभात आपकी कविता अच्छी थी धाराप्रवाह पढ़ता गया । धन्यवाद
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    मीना मल्लवरपु
    10 ਅਕਤੂਬਰ 2019
    a good way to look at the issue!