कुछ दिनों से मंगल का मन दुखी-सा था।शाम होते ही शराब की बोतल खोल ली थी।साथ ही साथ अपनी किस्मत को भी कोसे जा रहा था।शराब की घूंट भरते-भरते उसकी नजर सामने चल रहे टी. वी.के समाचारों पर पड़ी तो एम दम खुशी ...
डा.सुरेखा शर्मा (पूर्व हिन्दी/संस्कृत विभागाध्यक्ष) सदस्या -नीति आयोग,
समीक्षक /स्वतन्त्र लेखन.
पच्चास से अधिक कहानियां,आलेख,व्यंग्य, कविताएं, नाटक आदि विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित ।
दो कहानी संग्रह, बाल कविता,बाल एकांकी का प्रकाशन ।
सम्प्रति -कादम्बिनी क्लब गुड़गांव संचालिका
सारांश
<p>डा.सुरेखा शर्मा (पूर्व हिन्दी/संस्कृत विभागाध्यक्ष) सदस्या -नीति आयोग,<br />
समीक्षक /स्वतन्त्र लेखन.<br />
पच्चास से अधिक कहानियां,आलेख,व्यंग्य, कविताएं, नाटक आदि विभिन्‍न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित ।<br />
दो कहानी संग्रह, बाल कविता,बाल एकांकी का प्रकाशन ।<br />
सम्प्रति -कादम्बिनी क्लब गुड़गांव संचालिका</p>
अतिक्रूर और रोंगटे खड़े कर देने वाली कथा । इसे पढ़कर जितना भय हुआ उतना ही दुख भी और एक सवाल अंदर तक चीरते हुए चला गया कि क्या यही हमारे देश और समाज की सच्चाई है?
रिपोर्ट की समस्या
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अतिक्रूर और रोंगटे खड़े कर देने वाली कथा । इसे पढ़कर जितना भय हुआ उतना ही दुख भी और एक सवाल अंदर तक चीरते हुए चला गया कि क्या यही हमारे देश और समाज की सच्चाई है?
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