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हाल कैसा है जनाब का

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कभी आपने सोचा है कि किसी से मिलते ही या अक्सर फ़ोन पर बात करते करते बीच बीच में एक सवाल किया जाता है "क्या हाल है ?" और आप यंत्रवत जवाब देते हैं "ठीक है।" वास्तव में न तो पूछने वाले को रूचि है ...

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लेखक के बारे में

34 वर्षों तक अनेक बैंकों में कार्यरत रह कर और सेवाकाल के आखिरी वर्षों में विदेश के बैंक से CEO पद से सेवानिवृत्त हो कर, इन्होंने अपनी लेखन रूचि पर ध्यान दिया. देश विदेश में घूमे तो पाया कि हर व्यक्ति किसी कहानी का पात्र है और उससे जुड़े अनेक तजुर्बे ख़ुद कहानी हैं. उनके दर्द और खुशियों के लम्हों को महसूस करते ही कहानियां ख़ुद-ब-ख़ुद इनकी कलम से निकलने लगती हैं. इनकी अनेक कहानियां सरिता, वनिता, गृहशोभा, मनोरमा, मेरी सहेली इत्यादि में छप चुकी हैं. इनके अनुसार हास्य और व्यंग चहू ओर बिछा पड़ा है...बस...उसे पकड़ कर...समेट कर अपने शब्दों में बयाँ करना है. बाक़ी काम तो हमारे प्रिय पाठक कर देते हैं. इनका मानना है कि आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियायें ही हैं जो इन्हें आपका प्रेम दर्शाएँगी और इनकी लेखनी को और बेहतर बनाएँगी. अपने बृहत् बैंकिंग अनुभव के कारण, यह अपना अधिकतर समय लोगों को उनके personal finance में उनके नि:शुल्क ऑनलाइन मार्गदर्शन करने में लगाते हैं.

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    27 ജൂണ്‍ 2017
    अगर कोई हम से पूछे "सुरु, क्या हाल है ?" तो मेरा जवाब " मैं फ़िक्र को धुंए में उडाता चला गया ..."
  • author
    Pooja khosla
    18 ജൂണ്‍ 2017
    hahahaa ..very nice i was imagining whole scene ..very nice n true..vaise mai b kaphi bimar rehti hu ..tomujhse mat puchna ...
  • author
    kp
    12 നവംബര്‍ 2017
    आज के समय की वास्तविकता का आइना दिखाया है आपने।
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    27 ജൂണ്‍ 2017
    अगर कोई हम से पूछे "सुरु, क्या हाल है ?" तो मेरा जवाब " मैं फ़िक्र को धुंए में उडाता चला गया ..."
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    Pooja khosla
    18 ജൂണ്‍ 2017
    hahahaa ..very nice i was imagining whole scene ..very nice n true..vaise mai b kaphi bimar rehti hu ..tomujhse mat puchna ...
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    kp
    12 നവംബര്‍ 2017
    आज के समय की वास्तविकता का आइना दिखाया है आपने।