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ज्ञानरंजन कृत 'पिता' (कहानी)

4.3
646

पिता (कहानी) उसने अपने बिस्तरे का अंदाज लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फर्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया, ‘आ गए’ और बच्चे की तरफ करवट लेकर चुप हो गई। लेट ...

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लेखक के बारे में
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Prof INDU SINGH

भूतपूर्व प्रवक्ता विवेकानन्द डिग्री कॉलेज, हैदराबाद (अलग-अलग विद्यालयों एवं कॉलेज में लगभग 12 वर्षों का शिक्षण अनुभव)

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Poonam Sharma
    02 जनवरी 2021
    नायाब वर्णन सजल सहज सटीक शब्द नायक के मन को स्प्ष्ट करने में सफल रहे । आपकी लेखनी बहुत उम्दा हैं
  • author
    मनमोहन कौशिक
    18 मार्च 2021
    बहुत खूब! कथ्य को नायाब शिल्प में पिरोया गया है।
  • author
    annapurna gupta
    05 दिसम्बर 2021
    bahut sundar rachana
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  • author
    Poonam Sharma
    02 जनवरी 2021
    नायाब वर्णन सजल सहज सटीक शब्द नायक के मन को स्प्ष्ट करने में सफल रहे । आपकी लेखनी बहुत उम्दा हैं
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    मनमोहन कौशिक
    18 मार्च 2021
    बहुत खूब! कथ्य को नायाब शिल्प में पिरोया गया है।
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    annapurna gupta
    05 दिसम्बर 2021
    bahut sundar rachana