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गुरु दक्षिणा

4.6
60

बात उन दिनों की है जब मैं दसवीं कक्षा का छात्र हुआ करता था। घर पर जितना सीधा-सादा, विद्यालय में उतना ही उच्चकोटि का शैतान। अपने सहपाठियों को चिड़ाकर भाग जाना और उनके विचित्र- विचित्र नामकरण करना ...

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लेखक के बारे में

हिंदी साहित्य के अथाह सागर में गोते खाता एक लेखक......

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Uma Sharma
    23 अक्टूबर 2021
    बहुतबहुत सही लिखा हैआपनेबहुत ही सुन्दर रचना है।
  • author
    21 अप्रैल 2021
    वास्तविक गुरु ऐसा ही होना चाहिए। बहुत अच्छा लेख
  • author
    Fantastic
    21 अप्रैल 2021
    bahut achha sandesh
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    Uma Sharma
    23 अक्टूबर 2021
    बहुतबहुत सही लिखा हैआपनेबहुत ही सुन्दर रचना है।
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    21 अप्रैल 2021
    वास्तविक गुरु ऐसा ही होना चाहिए। बहुत अच्छा लेख
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    Fantastic
    21 अप्रैल 2021
    bahut achha sandesh