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गिर पड़े दाँत

4.4
900

गिर पड़े दाँत हुए मू-ए-सर ऐ यार सफ़ेद क्यूँ न हो ख़ौफ़-ए-अजल से ये सियह-कार सफ़ेद दो क़दम फ़र्त-ए-नज़ाकत से नहीं चल सकता रंग हो जाता है उस का दम-ए-रफ़्तार सफ़ेद उस मसीहा की जो आँखें हुईं गुल-ज़ार में ...

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लेखक के बारे में
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आघा हसन
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rittika Saxena "Chintu"
    23 अप्रैल 2018
    बेहतरीन उर्दू अलफ़ाज़.. वाह! बहुत ख़ूब लिखा है। 👌
  • author
    SS Sabiya
    05 अक्टूबर 2024
    nice gazal
  • author
    19 जून 2021
    good
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    Rittika Saxena "Chintu"
    23 अप्रैल 2018
    बेहतरीन उर्दू अलफ़ाज़.. वाह! बहुत ख़ूब लिखा है। 👌
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    SS Sabiya
    05 अक्टूबर 2024
    nice gazal
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    19 जून 2021
    good